धामी सरकार का बड़ा फैसला: अल्पसंख्यकों की 25 साल की स्थिति का होगा 'एक्स-रे'; सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अखिलेश चंद्र शर्मा करेंगे अध्यक्षता

धामी सरकार का बड़ा फैसला: अल्पसंख्यकों की 25 साल की स्थिति का होगा 'एक्स-रे'; सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अखिलेश चंद्र शर्मा करेंगे अध्यक्षता

Dhami Government Major Decision

Dhami Government's Major Decision

देहरादून। Dhami Government's Major Decision, उत्तराखंड में भाजपा की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने विधानसभा चुनाव में जाने से पहले अल्पसंख्यक कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है।

राज्य गठन के बाद से अब तक यानी 25 वर्ष की अवधि में यहां निवासरत अल्पसंख्यक समुदायों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक स्थिति में आए परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा।

अध्ययन के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अखिलेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय अल्पसंख्यक कल्याण उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

इस अध्ययन के बाद अल्पसंख्यक समुदायों की वर्तमान दशा के साथ उनके कल्याण के नाम पर खर्च की गई बड़ी धनराशि का सच भी सामने आएगा।

इसके आधार पर अल्पसंख्यक समुदायों के हितों के दावों के आधार पर की जाने वाली राजनीति के सुर बदलते दिखाई दे सकते हैं।

धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अनूठे प्रयोग से राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की अलग पहचान स्थापित कर दी है।

समान नागरिक संहिता के बाद अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षण व्यवस्था में समानता को प्रोत्साहित करने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित किया जा चुका है। यह नया कानून आगामी एक जुलाई से अस्तित्व में आ जाएगा।

इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड राज्य में समाप्त हो जाएगा। सरकार ने अब अल्पसंख्यक समुदायों की सही स्थिति जानने के लिए पहल करते हुए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की है।

विशेषज्ञ समिति की संस्तुतियों के आधार पर इन समुदायों की वास्तविक तस्वीर के आधार पर विकास एवं कल्याण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

छह माह होगा समिति का कार्यकाल, आगे बढ़ाया जा सकेगा

इस समिति के सदस्यों में सेवानिवृत्त मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, समाजसेवी व राजपाल सिंह शामिल हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक इसके पदेन सदस्य सचिव हैं। समिति के तीन सदस्य समान नागरिक संहिता के लिए गठित विशेषज्ञ समिति के सदस्य रह चुके हैंं।

समिति के सदस्यों को यात्रा व दैनिक भत्ता, मानदेय व अन्य अनुमन्य सुविधाओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किया जाएगा। विशेषज्ञ समिति का कार्यकाल गठन से छह माह तक होगा। इसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया भी जा सकेगा।

विशेषज्ञ समिति के अध्ययन का कार्यक्षेत्र

  • राज्य गठन के समय अल्पसंख्यक समुदायों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक व सांस्कृतिक स्थिति
  • राज्य के गठन से अब तक स्थिति में परिवर्तन
  • अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, संसद व राज्य विधानसभा से पारित कानूनों के पालन की स्थिति
  • उद्देश्यों की पूर्ति से संबंधित विभिन्न संस्थानों के सर्वेक्षण, अध्ययन, मूल्यांकन एवं विश्लेषण
  • मुख्य सचिव समेत शासन एवं विभागों के अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों को बैठक में आमंत्रित करना
  • अध्ययन पर आधारित भविष्य की विधिक व्यवस्था में यथा आवश्यक परिवर्तन

वक्फ बोर्ड पर केंद्र की माडल नियमावली अपना सकता है उत्तराखंड

उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों के संबंध में केंद्र सरकार की माडल नियमावली को अपना सकता है।

माडल नियमावली के अध्ययन के लिए शीघ्र शासन स्तर पर कमेटी गठित करने की तैयारी है। साथ में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से भी इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है।

इस प्रस्ताव के आधार पर राज्य की आवश्यकता के अनुसार नियमावली में आंशिक संशोधन पर विचार किया जा सकेगा।

अल्पसंख्यक कल्याण अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने बताया कि शासन ने बोर्ड को वक्फ बोर्ड से नियमावली के संबंध में प्रस्ताव मांगा है। केंद्र सरकार की नियमावली का अध्ययन कर शीघ्र राज्य की नियमावली पर निर्णय किया जाएगा।